क्या है पूरा मामला?
समाजवादी पार्टी (सपा) के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन ने राज्यसभा में एक बयान दिया, जिसमें उन्होंने मेवाड़ के वीर योद्धा राणा सांगा को 'गद्दार' कहा। उन्होंने कहा कि राणा सांगा ने मुगल शासक बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया था, जिससे देश के साथ विश्वासघात हुआ।
मंत्री रघुराज सिंह का तीखा बयान
इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के श्रम-सेवायोजन मंत्री ठाकुर रघुराज सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने रामजी लाल सुमन को 'मुगलों की नाजायज औलाद' करार दिया और कहा कि ऐसे लोग अपने पूर्वजों का सम्मान नहीं करते हैं। उन्होंने कहा—
"जो लोग अपने ही देश के महापुरुषों का अपमान करते हैं, वे गद्दार हैं। यह लोग मुगलों के समय में भी गद्दार थे, अंग्रेजों के समय में भी गद्दार थे और आज भी गद्दार हैं। इन पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा कि अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव जमीनी नेता थे, लेकिन अखिलेश विदेश में पढ़े हैं और उन्हें भारतीय इतिहास और भूगोल की जानकारी नहीं है।
रामजी लाल सुमन की सफाई
रामजी लाल सुमन ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा—
"इतिहास को स्वीकार करना होगा। बाबर को राणा सांगा ने इब्राहिम लोदी को हराने के लिए आमंत्रित किया था। उन्हें यह गलतफहमी थी कि बाबर एक लुटेरा है और वह लूटपाट कर वापस चला जाएगा। बाद में जब यह समझौता टूटा, तो राणा सांगा और बाबर के बीच खानवा का युद्ध हुआ, जिसमें राणा सांगा हार गए। यह इतिहास है, इसे कोई नकार नहीं सकता।"
करणी सेना का हंगामा और हमला
रामजी लाल सुमन के इस बयान के बाद करणी सेना ने उनके आगरा स्थित आवास पर हमला कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने उनके घर पर पथराव किया और गाड़ियों में तोड़फोड़ की। इसके बाद पुलिस को मौके पर आकर स्थिति नियंत्रित करनी पड़ी।
विवाद पर उठे बड़े सवाल
इस पूरे विवाद के बाद देशभर में ऐतिहासिक घटनाओं की व्याख्या और उसके वर्तमान राजनीतिक संदर्भ पर बहस छिड़ गई है।
1. क्या इतिहास को राजनीतिक लाभ के लिए तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है?
2. क्या राजनीतिक दलों को ऐतिहासिक महापुरुषों के नाम पर विवादित बयान देने से बचना चाहिए?
3. क्या इस तरह की बयानबाजी समाज में सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा देती है?
इस मामले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में जबरदस्त हलचल मचा दी है। भाजपा इसे राष्ट्रवाद से जोड़ रही है, तो सपा इसे इतिहास की सत्यता बता रही है। वहीं, करणी सेना और राजपूत संगठनों ने रामजी लाल सुमन से माफी की मांग की है। इस विवाद का राजनीतिक असर आने वाले चुनावों पर भी देखने को मिल सकता है।