भूकंप से भारी तबाही की आशंका, अर्थव्यवस्था को 2 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है
टोक्यो: जापान सरकार ने चेतावनी जारी की है कि देश के दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत तट पर स्थित नानकाई ट्रफ क्षेत्र में 9.0 तीव्रता तक का महाभूकंप आने की आशंका है। इस आपदा से देश में भारी जनहानि हो सकती है। अनुमान के अनुसार, लगभग 3 लाख लोग मारे जा सकते हैं, 13 लाख से अधिक लोग बेघर हो सकते हैं, और जापान की अर्थव्यवस्था को 2 ट्रिलियन डॉलर (171 लाख करोड़ रुपये) का नुकसान हो सकता है।
क्या है नानकाई ट्रफ और क्यों है खतरा?
नानकाई ट्रफ जापान के शिजुओका से क्यूशू तक फैली 900 किलोमीटर लंबी समुद्री खाई है, जहां फिलीपीन सागर प्लेट धीरे-धीरे यूरेशियन प्लेट के नीचे खिसक रही है। इस क्षेत्र में हर 100 से 150 साल में एक बार महाभूकंप आता है, जो भारी तबाही मचा सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगले 30 वर्षों में इस क्षेत्र में 75-82% संभावना है कि महाभूकंप आ सकता है।
कितनी गंभीर हो सकती है तबाही?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह महाभूकंप आता है, तो:
3 लाख से अधिक लोगों की जान जा सकती है।
13 लाख से अधिक लोग बेघर हो सकते हैं।
भारी सुनामी आ सकती है, जिससे कई तटीय शहर जलमग्न हो सकते हैं।
परमाणु संयंत्रों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे 2011 जैसी परमाणु आपदा दोबारा हो सकती है।
जापान की अर्थव्यवस्था को 2 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है।
2011 जैसी तबाही दोबारा?
मार्च 2011 में जापान में 9.0 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 18,500 लोग मारे गए या लापता हो गए थे। इस भूकंप के कारण आई सुनामी ने फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया था, जिससे विकिरण संकट उत्पन्न हुआ।
सरकार की तैयारियां और अलर्ट
जापान सरकार ने नागरिकों को चेतावनी देते हुए कहा है कि वे आपदा से निपटने के लिए तैयार रहें। सरकार ने आपातकालीन बचाव अभियान और नागरिक सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
वैज्ञानिकों का मानना है कि भूकंप की सटीक भविष्यवाणी करना कठिन है, लेकिन भूगर्भीय गतिविधियों के आधार पर इस क्षेत्र में अगले 30 वर्षों में ‘महाभूकंप’ आने की 75-82% संभावना जताई गई है।
जापान में महाभूकंप का खतरा लगातार बढ़ रहा है। यदि यह आता है, तो यह देश के इतिहास की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदा हो सकती है। सरकार और वैज्ञानिक इस आपदा से निपटने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन आम जनता को भी सतर्क रहने की जरूरत है।